आपको अपने जीवन के लक्ष्य जैसे रिटायरमेंट, घर खरीदना, कार खरीदना, बच्चों की पढ़ाई आदि को स्पष्ट रखना चाहिए जिससे आपको यह पता रहे की किस लक्ष्य के लिए कितना इन्वेस्टमेंट करना है.

स्टॉक मार्केट में लोग कहते हैं कि अधिक रिस्क अधिक रिटर्न तथा कम रिस्क सीमित रिटर्न देता है, परंतु यह हमेशा सही नहीं होता है. एक इन्वेस्टर को अपनी Risk Appetite समझ कर प्रोफेशनल की मदद लेकर इन्वेस्ट करना चाहिए.

जब मार्केट ऊपर जा रहा हो तो लोग लालच में ऊँचे दाम पर शेयर खरीदने और जब मार्केट गिर रहा होता है तो डर में शेयर कम दाम पर बेंचने से इन्वेस्टर को भारी नुकसान होता है. एक स्मार्ट और सक्सेसफुल इन्वेस्टर हमेशा इन भावनाओं के बजाय डाटा पर विश्वास करता है.

सफल इन्वेस्टर हमेशा अपने इन्वेस्टमेंट में डायवर्सिफिकेशन को अपनाते हैं जिसके अंतर्गत वह अपना पैसा शेयर, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, गोल्ड और रियल एस्टेट आदि में लगाते हैं.

स्टॉक मार्केट शॉर्ट टर्म में एक सट्टा है, परंतु लॉन्ग टर्म में वैल्यू क्रिएटर है. लॉन्ग टर्म कंपाउंडिंग से इन्वेस्टर को बहुत अधिक लाभ प्राप्त होता है.