NiveshWorld
Goal Based Age Based News Blog Tools Demat Account Kholein

Bhasha Chunein

Admin Free mein shuru karein
Cyber Security

Digital Arrest अथवा Digital House Arrest: साइबर क्राइम का 1 नया तरीका!

NiveshWorld Team 4 October 2024 8 min read

Digital Arrest अथवा Digital House Arrest क्या होता है?

जब किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया, टेलीफोन कॉल, व्हाट्सएप ऑडियो कॉल अथवा व्हाट्सएप वीडियो कॉल आदि के माध्यम से डरा धमका कर उसे अपने ही घर में कैद कर दिया जाता है, तब इसे Digital Arrest अथवा Digital House Arrest कहते हैं.

Digital Arrest साइबर स्कैम करने का एक नया तरीका है. इसमें साइबर स्कैम करने वाला अपराधी स्वयं को पुलिस, सीबीआई, इंटेलिजेंस, नारकोटिक्स डिपार्टमेंट, ई डी अथवा कस्टम का अधिकारी बताकर व्यक्ति को डरा धमका कर घंटों या कई दिनों तक कैमरे के सामने बैठने के लिए मजबूर कर देता है.

Digital Arrest एक ऐसा शब्द है जो कानून में नहीं है लेकिन इसका यूज़ इसको अंजाम देने वाले लोग करते हैं.

क्या Digital Arrest वैधानिक है?

जैसा कि हम सभी लोगों को यह जानकारी प्राप्त होती है कि किसी व्यक्ति द्वारा जब नियमों के विपरीत कोई कार्य किया जाता है तब उसे पुलिस द्वारा अरेस्ट कर लिया जाता है.

जबकि डिजिटल अरेस्ट में व्यक्ति ठगी के उद्देश्य से किसी निर्दोष व्यक्ति को अपना शिकार बनाता है और उसे डरा धमकाकर उसी के घर में कैद कर मानसिक रूप से परेशान कर उससे पैसे ठग लेता है. इस प्रकार Digital Arrest पूर्ण रूप से अवैधानिक (Illegal) है.

Digital Arrest करने का मुख्य उद्देश्य?

Digital Arrest की पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने वाले व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य ठगी के माध्यम से पैसा वसूल करना होता है.

Digital Arrest के कुछ आंकड़े

RBI द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023 में देश में 30,000 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक फ्रॉड केसेस दर्ज किए गए हैं. गत एक दशक में भारतीय बैंक्स में 65,017 फ्रॉड के केसेस प्रकाश में सामने आए हैं, जिसके कारण ₹4.69 लाख करोड़ की ठगी हुई है.

डिजिटल अरेस्ट के कुछ मामले

उत्तर प्रदेश के पीजीआइ लखनऊ की डॉक्टर को ठगों ने 8 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट किए रखा और फिर उनसे अपने 7 अलग-अलग खातों में 2.81 करोड़ रुपए ट्रांसफर करा लिए.

दिल्ली एनसीआर के नोएडा की महिला डॉक्टर को 2 दिन डिजिटल अरेस्ट करते हुए टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी का फर्जी ऑफिसर बन कर 59 लाख रूपये ठग लिए.

तेलंगाना के हैदराबाद के युवक को उसके नाम वाले पार्सल में ड्रग्स का भय दिखाकर उसे 20 दिनों तक घर पर डिजिटल अरेस्ट रख कर 1.20 करोड़ रूपये ठग लिए.

उ.प्र. के नोएडा में 79 वर्ष के सेवानिवृत्त मेजर जनरल को 10 से 15 अगस्त तक डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने वालों ने आरटीजीएस के माध्यम से 2 करोड़ रु. ट्रांसफर करा लिए.

मध्य प्रदेश के भोपाल में 66 वर्ष के एक रिटायर्ड लेक्चरर से 7 दिनों में 1.30 करोड़ रूपये ठगी कर लिए गए.

उत्तराखंड के देहरादून निवासी महिला को 30 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट कर ठगों ने इस महिला से 10.5 लाख रूपये अपने अकाउंट में ट्रान्सफर करवाए.

कर्नाटक राज्य के बेंगलूरू के 73 वर्ष के बुजुर्ग को 6 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 3.8 करोड़ रूपये ठग लिए.

Digital Arrest कैसे किया जाता है?

डिजिटल हाउस अरेस्ट के इस साइबर स्कैम में आमतौर से चार से पांच स्टेप होते हैं.

पहला स्टेप - किसी व्यक्ति की सामान्य व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करना

सर्वप्रथम ठगी करने वाला व्यक्ति सोशल मीडिया, ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अथवा अन्य माध्यमों से किसी व्यक्ति की मोबाइल नंबर सहित नाम, शहर का नाम आदि की सामान्य व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करता है.

दूसरा स्टेप - व्यक्ति को कॉल करना

सामान्य व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करने के पश्चात ठगी करने वाला व्यक्ति उस व्यक्ति को फोन कर उसके नाम से संबोधित करता है और यह बताता है कि वह पुलिस, सीबीआई, इंटेलिजेंस, नारकोटिक्स डिपार्टमेंट, ई डी अथवा कस्टम का अधिकारी बोल रहा है.

तीसरा स्टेप - डरा धमका कर दहशत पैदा करना

ठगी करने वाला व्यक्ति पीड़ित व्यक्ति पर झूठा आरोप लगाता है और उस पर तत्काल कार्रवाई किए जाने का दबाव बनाता है, जिससे पीड़ित व्यक्ति दहशत में आ जाता है. पीड़ित व्यक्ति पर सामान्य रूप से लगाए जाने वाले झूठे आरोप निम्न हैं:

  1. आपके लड़के ने एक लड़की के साथ गलत काम किया है
  2. आपने गलत तरीके से ऑर्डर करके ड्रग्स या नशीला पदार्थ मंगाया है
  3. आपके खाते में गलत तरीके से या गलत गतिविधियों के माध्यम से पैसा आया है
  4. तुम्हारे खिलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ हुई है या तुम्हारे खिलाफ़ महिला ने शिकायत दर्ज़ की है
  5. एयरपोर्ट पर एक पार्सल मिला है जिसमे प्रतिबंधित पदार्थ मिला है
  6. तुम्हारी मोबाइल में पोर्न वीडियोज देखे गये हैं

चौथा स्टेप - पीड़ित व्यक्ति को अलग-थलग करना

ठग पीड़ित व्यक्ति पर कार्यवाही किए जाने का भय दिखाकर यह निर्देश देता है कि इसके बारे में पीड़ित व्यक्ति किसी को ना बताएं.

पांचवां स्टेप - ठगी को अंजाम देना

इसके अंतर्गत ठगी करने वाला व्यक्ति पीड़ित व्यक्ति से विशेष कार्य करने के लिए कहता है:

  1. किसी विशेष खाते में पैसा ट्रांसफर करवाना
  2. पीड़ित व्यक्ति से बैंक खाता, पैन नंबर, आधार कार्ड आदि की जानकारी लेना
  3. मैलवेयर या किसी ऐप को फ़ोन पर डाउनलोड करवाना
  4. बैंक ट्रांजैक्शन के लिए ओटीपी लेना

Digital Arrest का पैसा कहाँ जाता है?

अभी तक हुई पुलिस जांच से यह ज्ञात हुआ है कि इस प्रकार की ठगी में जिन खातों में रकम ट्रांसफर होती हैं वो ज्यादातर श्रमिकों और बेरोजगारों के खाते होते हैं. ठगी करने वाले कॉलिंग के लिए विदेशी नेटवर्क का यूज करते हैं.

Digital Arrest से स्वयं को कैसे बचाएं?

अननोन अथवा अवांछित कॉल से सावधान रहें

बैंक इत्यादि कोई भी हमारी व्यक्तिगत जानकारी फोन करके नहीं पूछते हैं.

कॉल करने वाले व्यक्ति की वैधता की जांच करें

यदि कोई संदिग्ध कॉल आती है तो आप तुरंत कॉल काट दें, उससे बात ना करें और वास्तविक विभाग से बात करें.

कॉल के माध्यम से कभी भी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें

कभी भी फोन पर कॉल के माध्यम से अपनी कोई भी व्यक्तिगत जानकारी किसी को ना दें.

दबाव में आकर कोई निर्णय न लें

जब भी इस प्रकार की कोई कॉल आए तो आप दबाव में ना आएं. फोन कॉल को काट दें और शांत बैठ जाएं.

अपने विश्वसनीय व्यक्ति से बात करें

आपके पास ऐसा कोई फोन कॉल आता है जो आपको संदिग्ध लगता है तो उसके बारे में अपने विश्वसनीय व्यक्ति से बात करें.

साइबर सुरक्षा की जानकारी रखें एवं स्वयं को अपडेट रखें

ठगी करने वाले अक्सर ऐसी कॉल +92 या दूसरे देशों के नंबरों से करते हैं. अगर कोई पुलिस अधिकारी या अन्य सरकारी अधिकारी फोन करेगा तो वह सीयूजी नंबर से करेगा.

संदिग्ध गतिविधि की सूचना दें

इसके अंतर्गत आप सरकार द्वारा स्थापित पुलिस सहित अन्य पोर्टल पर Digital Arrest की शिकायत दर्ज कराएँ.

Digital Arrest से बचाव के लिए स्थापित सरकारी संस्थाएं एवं पोर्टल

भारत सरकार ने साइबर और ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने के लिए संचार साथी वेबसाइट में चक्षु पोर्टल लॉन्च किया है. इसके साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @cyberdost के जरिए भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

  • राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल – cybercrime.gov.in
  • साइबर अपराध हेल्पलाइन – 1930
  • भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) – cert-in.org.in

निष्कर्ष

हम सभी जानते हैं कि इंटरनेट हम सभी के जीवन को सुविधाजनक बनाता है, परंतु इसमें कुछ निहित खतरे भी हैं, जो व्यक्ति को कभी-कभी परेशानी में डाल देते हैं. इन्हीं खतरों में से एक खतरा डिजिटल अरेस्ट अथवा डिजिटल हाउस अरेस्ट है. हम आशा करते हैं कि आप इस आर्टिकल को पढ़कर जानकार बनेंगे तथा अपने जानने वालों को यह जानकारी शेयर करेंगे, जिससे आप और आपके जानने वाला कोई भी व्यक्ति इस साइबर स्कैम में न फंसे.

Disclaimer

Yeh article kewal shaikshik aur soochnatmak uddeshy ke liye hai. Nivesh se pehle SEBI-Registered Financial Advisor se paramarsh avashya lein. Share Market mein nivesh jokhim ke adheen hai.

Disclaimer: NiveshWorld sirf educational aur informational purposes ke liye hai. Yeh platform koi bhi investment advice nahi deta. Stock market mein nivesh jokhim ke adheen hai. Kripya koi bhi nivesh karne se pehle apne financial advisor se salah lein. Past performance future returns ki guarantee nahi hai.