Energy Sector निवेश के लिए बहुत ही आकर्षक क्षेत्र है. यह क्षेत्र जितना महत्वपूर्ण है उतना ही निवेश के लिए लाभप्रद भी है. आदिमानव द्वारा आग की खोज से लेकर वर्तमान समय में एटॉमिक एनर्जी एवं ग्रीन हाइड्रोजन तक की लंबी गाथा से यह स्पष्ट हो जाता है कि हमारे जीवन में एनर्जी का अत्यधिक महत्व रहा है और आगे भी रहेगा.
भारत में ऊर्जा की खपत
Energy Sector में निवेश से लाभ का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि जुलाई 2023 तक भारत अपनी स्थापित बिजली क्षमता 423.25 GW के साथ विश्व स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है. भारत का Energy Sector निवेश की दृष्टि से एक आकर्षक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है.
Energy Sector में सरकार के योगदान का महत्व
मानव उपयोगी रूप में ऊर्जा की प्राप्ति के लिए प्रारंभिक अवस्था में अत्यधिक निवेश की आवश्यकता होती है. जहां एनर्जी उत्पादन की बात आती है वहां बड़े स्तर पर कदम उठाने की जरूरत होती है, इसलिए सरकार ने Energy Sector के विकास के लिए बहुत से कदम उठाए हैं.
Energy Sector हेतु सरकार द्वारा आवंटित बजट
सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी पर वर्ष 2024-25 के बजट में काफी फोकस किया है. सरकार ने National Green Hydrogen Mission (NGHM) के लिए 600 करोड़ रुपये एवं Solar Projects के लिए 10,000 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की है.
Energy Sector के फंड
बजट घोषणा के कुछ दिनों बाद ही SBI म्यूचुअल फंड ने SBI एनर्जी अपॉर्चुनिटीज फंड लॉन्च किया. इस थीमैटिक फंड ने अपने NFO अवधि के दौरान 6,547 करोड़ रुपये की विशाल धनराशि जुटाई, जो ICICI Flexi Cap और SBI Multi Cap के बाद तीसरा सबसे बड़ा फंड बन गया.
Energy Sector के विभिन्न फंड्स की परफॉर्मेंस
| फंड का नाम | 1 माह का रिटर्न | 1 साल का रिटर्न | 3 साल का रिटर्न | 5 साल का रिटर्न |
|---|---|---|---|---|
| निप्पॉन इंडिया पावर एंड इंफ्रा फंड | 3.06% | 82.54% | 40.24% | 31.66% |
| टाटा रिसोर्सेज एंड एनर्जी फंड | 3.92% | 1.52% | 20.96% | 28.98% |
| डीएसपी नैचुरल रिसोर्सेज एंड न्यू एनर्जी फंड | 3.43% | 56.69% | 24.87% | 26.65% |
| एसबीआई एनर्जी अपॉर्चुनिटीज फंड | 5.06% | अभी नया फंड है | — | — |
इनमें से निप्पॉन इंडिया पावर एंड इंफ्रा फंड की धनराशि एनर्जी फंड्स के अलावा इंफ्रा फंड्स में भी निवेश की गई है. Energy Sector फंड थीमेटिक होते हैं, जिससे इस फंड की 80% धनराशि इसी सेक्टर की कंपनियों में इन्वेस्ट होती है. डायवर्सिफिकेशन की कमी के कारण ऐसे फंड उतार-चढ़ाव भरे होते हैं, इसलिए निवेशकों को फंड की परफॉर्मेंस समय-समय पर चेक करते रहने की सलाह दी जाती है.
Energy Sector के म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लाभ
अच्छी संभावना
भारत Energy Sector में बड़े सुधारों के दौर से गुजर रहा है और यह क्षेत्र लंबी अवधि में अच्छे रिटर्न देने की प्रबल क्षमता रखता है.
दीर्घ अवधि पूंजी वृद्धि
Energy Sector के फंड दीर्घ अवधि में वृद्धि की संभावना वाली कंपनियों की पहचान कर उनमें निवेश करते हैं, जिससे दीर्घकालिक पूंजी वृद्धि होती है.
विविधीकरण
Energy Sector के फंड प्राकृतिक संसाधनों की खोज, विकास, उत्पादन, वितरण एवं खनन के साथ-साथ वैकल्पिक एनर्जी और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में भी निवेश करते हैं, जिससे पर्याप्त विविधता बनी रहती है.
व्यावसायिक प्रबंधन
Energy Sector के फंड मैनेजर एनर्जी स्टॉक चुनने पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे निवेशक उनकी विशेषज्ञता का लाभ उठा सकते हैं.
रिन्यूएबल एनर्जी के लाभ
भारत में रिन्यूएबल एनर्जी की कीमतें दुनिया में सबसे कम हैं. भारत में सबसे बड़े लिथियम भंडार भी पाए गए हैं, जो ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में मददगार होंगे.
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
- Net Zero by 2070: भारत ने वैश्विक लक्ष्य से दो दशक बाद, वर्ष 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य रखा है
- 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 45% कमी (2005 के स्तर से)
- 2030 तक 50% गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित उत्पादन क्षमता
- 2030 तक 2.5-3 बिलियन टन कार्बन सिंक कवरेज बढ़ाना
- 2021-2030 तक 1 बिलियन टन उत्सर्जन में कमी
- 2025 तक 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य
- 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य
इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सरकार ने स्वचालित मार्ग के अंतर्गत 100% तक FDI, ISTS शुल्क में छूट, Ultra-Mega Renewable Energy Parks, PM-KUSUM व सोलर रूफटॉप जैसी योजनाओं तथा Green Energy Corridor Scheme जैसे कई कदम उठाए हैं.
सार
निफ्टी एनर्जी में निवेश करना उन निवेशकों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है जो अपने पोर्टफोलियो को Energy Sector के स्टॉक्स के साथ विविधित करना चाहते हैं. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एनर्जी उपभोक्ता है और तेज आर्थिक विकास के कारण आने वाले दशकों में इसकी एनर्जी मांग चौगुनी हो जाएगी. Energy Sector में लंबे समय में विकास के लिए आशाजनक संभावनाएं विद्यमान हैं, परंतु सेक्टोरल फंड्स अत्यधिक जोखिम भरे भी होते हैं, इसलिए निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. नेट जीरो उत्सर्जन क्या है?
नेट जीरो उत्सर्जन का अर्थ है कि कोई देश जितना कार्बन उत्सर्जन करेगा, उतनी ही कार्बन सोखने की व्यवस्था भी करेगा, जिससे ग्रीन हाउस गैस का जमाव न हो.
2. निफ्टी एनर्जी का अर्थ क्या है?
निफ्टी एनर्जी भारतीय एनर्जी बाजार की गतिशीलता का प्रतिनिधित्व करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स है.
3. ग्रीन हाइड्रोजन क्या है?
ग्रीन हाइड्रोजन नवीकरणीय ऊर्जा का एक स्रोत है, जिसमें पानी से हाइड्रोजन अणु का उत्पादन किया जाता है और बहुत कम कार्बन का उत्सर्जन होता है.