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Mutual Fund

HSBC INDIA EXPORT OPPORTUNITIES FUND से अपने पोर्टफोलियो को एक्सपोर्ट के जहाज पर सवार करें

NiveshWorld Team 6 September 2024 9 min read

HSBC Mutual Fund का परिचय

HSBC Asset Management Company (AMC) भारत में HSBC ग्लोबल की निवेश शाखा है. इसमें HSBC ग्लोबल एवं ICICI प्रूडेंशियल की बराबर अर्थात 50-50% की हिस्सेदारी है. यह शाखा भारत में म्यूचुअल फंड और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस से संबंधित कार्य करती है और वर्ष 2004 से कार्य कर रही है.

26 नवंबर 2022 को एक समझौते के तहत HSBC ने एल एंड टी म्यूचुअल फंड का अधिग्रहण कर लिया, जिससे अब एल एंड टी म्यूचुअल फंड की समस्त योजनाएं HSBC के नाम से जानी जाती हैं.

HSBC INDIA EXPORT OPPORTUNITIES FUND का परिचय

HSBC INDIA EXPORT OPPORTUNITIES FUND एक्सपोर्ट सेक्टर से संबंधित थीम आधारित NFO फंड है. यह NFO फंड 05 सितंबर 2024 को खुला है और 19 सितंबर 2024 को बंद होगा. इसके बाद यह NFO अलॉटमेंट के बाद 30 सितंबर 2024 से पुनः खुलेगा जिसमें SIP के रूप में या lump sum धनराशि से निवेश कर सकते हैं.

HSBC INDIA EXPORT OPPORTUNITIES FUND: एक नज़र में

बिंदुविवरण
म्यूचुअल फंड हाउसHSBC Mutual Fund
स्कीम का नामHSBC India Export Opportunities Fund
स्कीम का प्रकारAn open-ended equity scheme following export theme
थीमेटिक/सेक्टोरल फंडएक्सपोर्ट थीम/सेक्टर
NFO प्रारंभ होने का दिनांक05 सितंबर 2024
NFO बंद होने का दिनांक19 सितंबर 2024
फंड पुनः खुलने का दिनांक30 सितंबर 2024
बेंचमार्कNifty 500 Total Return Index (TRI)
Scheme Risk-o-meterबहुत ज्यादा (Very High)
फंड मैनेजरअभिषेक गुप्ता (Equity), सोनल गुप्ता (Overseas)
निवेश का प्रकारDirect और Regular दोनों
निवेश के OptionsIDCW और Growth दोनों
लोडएंट्री लोड: कोई नहीं. एग्जिट लोड: 1 वर्ष के भीतर 10% तक रिडीम/स्विच पर कोई लोड नहीं, 10% से अधिक पर 1% लोड. 1 वर्ष के बाद कोई लोड नहीं.
न्यूनतम निवेश की राशिलम्प सम के लिए 5000 रुपये और उसके बाद 1 रुपये के गुणांक की कोई भी राशि
NFO Price10 रुपये

HSBC INDIA EXPORT OPPORTUNITIES FUND में निवेश का उद्देश्य

यह फंड उन निवेशकों के लिए उपयोगी है जो लंबे समय में धन वृद्धि (long term capital appreciation) चाहते हैं. इस ओपन-एंडेड इक्विटी फंड का उद्देश्य एक्सपोर्ट थीम/सेक्टर में लगी कंपनियों की इक्विटी और इक्विटी-संबंधित प्रतिभूतियों में मुख्य रूप से निवेश करके भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर की क्षमता से लाभ अर्जित करना है.

HSBC INDIA EXPORT OPPORTUNITIES FUND में लोड

एंट्री लोड: कोई नहीं है.

एग्जिट लोड: 1 वर्ष के भीतर 10% तक रिडीम/स्विच करने पर कोई लोड नहीं लगेगा. 1 वर्ष के अंदर 10% से अधिक रिडीम/स्विच करने पर 1% लोड लगेगा और 1 वर्ष के बाद रिडीम/स्विच करने पर कोई लोड नहीं लगेगा. रिडीम/स्विच FIFO के आधार पर होगा.

HSBC INDIA EXPORT OPPORTUNITIES FUND की Investing Style

इस फंड की निवेश स्टाइल एवं दृष्टिकोण निम्न बिंदुओं पर आधारित है:

  1. एक्सपोर्ट क्षेत्रों के विकास के चालकों के विश्लेषण के आधार पर निवेश के अवसरों की पहचान
  2. वस्तुओं या सेवाओं के निर्यात से लाभान्वित होने वाले क्षेत्रों में फोकस और चुनिंदा स्टॉक का चयन
  3. व्यवसाय के मूल सिद्धांत, उद्योग संरचना और प्रबंधन की गुणवत्ता का आकलन
  4. आर्थिक कारकों के प्रति संवेदनशीलता व कंपनी की वित्तीय मजबूती
  5. सापेक्ष मूल्यांकन, मौलिक मूल्यांकन व बाजार आकार जैसी मूल्यांकन पद्धतियां

इस योजना में लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियों में निवेश करने की लचीलापन है, जो बाजार में एक्सपोर्ट थीम का हिस्सा हैं.

जोखिम

किसी भी क्षेत्र-विशिष्ट फंड की तरह, HSBC India Export Opportunities Fund में एक्सपोर्ट क्षेत्र से जुड़े विशिष्ट जोखिम हैं, जैसे कमोडिटी मूल्य में उतार-चढ़ाव, नियामक परिवर्तन और भू-राजनीतिक कारक.

डायवर्सिफिकेशन

इस फंड में डायवर्सिफिकेशन का विशेष ध्यान रखा गया है. यूएस एवं यूरोप के अतिरिक्त Africa, Latin America, and Southeast Asia के बाजारों पर विशेष फोकस है. इसके अलावा Diversification of Export Markets, Promotion of Manufacturing, Trade Agreements, Focus on High-Value Sectors, Resilient Supply Chains तथा Sustainability and Green Exports पर भी विशेष फोकस है.

HSBC INDIA EXPORT OPPORTUNITIES FUND में निवेश की जरूरत क्यों?

भारतीय अर्थव्यवस्था विकास, इमर्जिंग थीम्स और संभावनाओं का एक आकर्षक मिश्रण है. भारत जीडीपी के आधार पर विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और क्रय शक्ति समता के हिसाब से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. एक्सपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है — वित्तीय वर्ष 2023-24 में एक्सपोर्ट 783 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो 15 साल पहले मात्र 295 बिलियन डॉलर था.

HSBC INDIA EXPORT OPPORTUNITIES FUND का एसेट एलोकेशन

Types of InstrumentsMinimum Allocation (%)Maximum Allocation (%)
Equities व Equity related securities (एक्सपोर्ट से जुड़ी कंपनियां)80100
अन्य Equity व equity related securities020
Debt Securities व Money Market instruments020
Units issued by REITs & InvITs010

एक्सपोर्ट सेक्टर में शामिल प्रमुख क्षेत्र

  1. Engineering Goods
  2. Petroleum Products
  3. Gems & Jewellery
  4. Organic & Inorganic Chemicals
  5. Electronic Goods
  6. Drugs & Pharmaceuticals
  7. Readymade Garments

इस फंड में किसे निवेश करना चाहिए?

ऐसे निवेशक जो अपने पोर्टफोलियो में विविधता (Diversification) लाने के लिए नए फील्ड/सेक्टर पर ध्यान केंद्रित कर निवेश से लाभ कमाना चाहते हैं, उनके लिए यह थीम/सेक्टर आधारित NFO अच्छा विकल्प है. साथ ही वे निवेशक जो एक्सपोर्ट सेक्टर में लगी कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं और भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनना चाहते हैं, उनके लिए भी यह उपयुक्त है.

निष्कर्ष

एक्सपोर्ट किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है. जिस देश का एक्सपोर्ट जितना अधिक होगा, उस देश की अर्थव्यवस्था उतनी ही अच्छी होगी. भारत का एक्सपोर्ट सेक्टर एक बहु-दशकीय सेक्टर है, इसलिए HSBC India Export Opportunities Fund से लाभ कमाने के इच्छुक निवेशकों को कम से कम 5 से 7 साल तक निवेशित रहना जरूरी है.

महत्वपूर्ण: निवेशकों के लिए अपने निवेश उद्देश्य, रणनीति, जोखिम कारकों और शुल्कों पर व्यापक जानकारी के लिए एचएसबीसी एसेट मैनेजमेंट द्वारा प्रदान किए गए फंड के विस्तृत दस्तावेजों की समीक्षा करना महत्वपूर्ण है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. एक्सपोर्ट अपॉर्चुनिटी फंड क्या होते हैं?

ऐसा फंड जो मुख्य रूप से एक्सपोर्ट सेक्टर की कंपनियों में निवेश के लिए बनाया गया हो और इसके अंतर्गत जमा होने वाली धनराशि एक्सपोर्ट सेक्टर की कंपनियों में निवेश की जाती है.

2. ओपन एंडेड इक्विटी स्कीम क्या होती है?

ओपन एंडेड इक्विटी स्कीम के तहत, एसेट मैनेजमेंट कंपनी दैनिक आधार पर नए निवेशकों को इकाइयां खरीदती और बेचती है. NFO की समय-सीमा समाप्त होने के बाद इन स्कीम की इकाइयों को खरीदा और बेचा जा सकता है.

3. NFO क्या होता है?

NFO का पूरा नाम न्यू फंड ऑफर है. यह एसेट मैनेजमेंट कंपनी द्वारा फंड की नई कैटेगरी लॉन्च करने के लिए सब्सक्रिप्शन ऑफर है.

4. एंट्री लोड और एग्जिट लोड क्या होते हैं?

जब कोई निवेशक पहली बार म्यूचुअल फंड यूनिट्स खरीदता है तो चार्ज होने वाला शुल्क एंट्री लोड कहलाता है (सामान्यतः शून्य होता है), और यूनिट्स बेचने पर चार्ज होने वाला शुल्क एग्जिट लोड कहलाता है.

5. एसेट एलोकेशन क्या होता है?

फंड का पैसा शेयर बाजार में जिन विभिन्न सेक्टर की कंपनियों में लगता है उसे एसेट एलोकेशन कहते हैं.

Disclaimer

Yeh article kewal shaikshik aur soochnatmak uddeshy ke liye hai. Nivesh se pehle SEBI-Registered Financial Advisor se paramarsh avashya lein. Share Market mein nivesh jokhim ke adheen hai.

Disclaimer: NiveshWorld sirf educational aur informational purposes ke liye hai. Yeh platform koi bhi investment advice nahi deta. Stock market mein nivesh jokhim ke adheen hai. Kripya koi bhi nivesh karne se pehle apne financial advisor se salah lein. Past performance future returns ki guarantee nahi hai.